तुम्हे ईद मुबारक़ खाक -ए वतन की यह अनूठी रीत कामयाब रहेगी , अमन - चैन , मुहब्बत की मिशाल नायाब रहेगी , काशी का नज़ारा , जम जम का वो पानी , आबाद थी , आबाद है, आबाद कहानी , रहमत के तलबगा़र को उम्मीद मुबारक़ , मुझे चांद की दीद , तुम्हें ईद मुबारक़ || सर्वाधिकार सुरक्षित विरंजय सिंह 31मार्च 2025
पुरुष हूँ मैं कैसे कहूं की हो कर भी नहीं होता हूं मैं, उसे तसल्ली भी देता हूँ, वहाँ नहीं होकर भी वहीं होता हूं मैं, आ खों मे दरिया दफ्न है मेरे भी , फफक कर भी नहीं रोता हूं मैं | वो चैन की नींद सोते रहें ,इसी शौक से , मुझे पता है सो कर भी नहीं सोता हूँ मैं, दिन भर , रात भर, जीवन भर चलता हूं , पर कैसे कहूं की थक गया हूँ मैं, न जाने कितनों का हौसला हूँ मैं || सर्वाधिकार सुरक्षित विरंजय २१ मार्च २०२५ मीरजापुर